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जीवन_राही

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                                            जीवन_राही                             बेगाने शहर में अब मन सा लगने लगा है                               पुराना गाँव अब भूल सा गया हूं,                             भागदौड़ में आराम की आस है मुझे                                अजनबी कहते हैं मैं थोड़ा नया हूं                                अब किसको पता, किसको ख़बर                                     अभी जहां पहुंचा...

आखिरी विदाई

सब ठहरे, सब ने सोचा, सब भावुक हुए, सब ने लिखा, सब से कहा, सब गले मिले, सब ने आंसू बहाए, सब के लिए आखिरी बार था, उस दृश्य को देख पाना, उस पल में जीना, सब में कोई नफरत न थी सब में कोई तेजी न थी सबको कहीं जाना न था सारे कठोर हिम, पिघल चुके थे... आखिरी वक्त में, सब इंसान देखते हैं, बुराई नहीं, कमियां नहीं  उसके चले जाने का खालीपन, रुलाता है सबको झकझोरता है अंदर से कि अब, शायद उससे कभी मुलाकात न हो आखिरी विदाई कुछ इस तरह बहुतों के हिस्से में आती है जो इंसान होते हैं जो जीते हैं थोड़े पल किसी के लिए, बिना मतलब के, बिना किसी चाहत के, उम्मीद के उन्हें अंत में मिलती है विजई महसूस कराने वाली विदाई... ✍️"मयंक"

जीवन_राही

स्त्रियों ने श्रृंगार किया, पुरुषों ने तारीफें की पुरुषों ने युद्ध लड़े, स्त्रियों ने जौहर किया और कुछ इस तरह दोनों ने  मनुष्य होने का परिचय दिया... "मयंक"

इश्क़ _मोहब्वत

सरल बातों से, सरल अंदाज़ में, सरलता से पेश आते हो, ऐसा सरल गुण कहां से लाते हो? जवाब में सरलता से कह दिए कि बहुत पेचीदा हूं मैं, पर मुझे बिल्कुल शीशे की तरह, साफ नज़र आते हो। क्या तुम में कोई कमी नहीं? ऐब नहीं? तुमने कहा बिल्कुल है, पर मैं समझ नहीं पाया, आखिर कैसे उसे छिपाते हो?  "मयंक"

Ganatantra Diwas

समंदर की गहराई मानो, पर्वत की ऊंचाई मानो, या मानो गगन सा विशाल, दुनिया हम से सीखती है, हमारा संविधान है बेमिसाल... हमने लड़ी एक जंग है, इसलिए दिन ये आया है, देखो कितनी शान से, फिर तिरंगा लहराया है "Mayank"

बीती _बात

कैसे दूर करें खालीपन? अब दिल को क्या समझाएं? थोड़ा वक्त ये कट जाता बस, पर वक्त कहां से लाएं? दुनिया बदली, मौसम बदला बदली सभी फिजाएं  रह गए खड़े वहीं पर हम तो किस ओर भला हम जाएं? न यार पुराने मिलते हैं अब किसको हाल सुनाएं? बस थोड़ी बातें हो जाती तो फुरसत से हम सो जाएं... मैं पहले ऐसा बिल्कुल न था पर बदली सभी हवाएं  मैने लड़ने की कोशिश भी की अब किस किस को समझाएं? इन खामोशी में बिखरा मैं शोर कहां से लाएं  कैसे दूर करें खालीपन? अब दिल को क्या समझाएं? "मयंक"

खुद समझ लो

हर बात नहीं बताई जा सकती बोल कर तुम्हें खुद समझना होगा क्यों मैं जी पाता हूं  संग तुम्हारे दिल खोल कर ये तुम्हारा ही तो सवाल था न कि मैं कैसा लगता हूं तुम्हें  तो सुनो तुम अच्छे नहीं बहुत अच्छे लगते हो हंसते हो तो चांद  और रोते हो तो बच्चे लगते हो वो जो गुस्सा है तुम्हारा  उससे कहो कम आया करे तुम गुस्से में और भी हसीन लगते हो मैं बार बार दिल नहीं हार सकता मुझे नहीं आता है बोलना नाप तोलकर हर बात नहीं बताई जा सकती बोल कर... कुछ बातों से शायद चुभन भी हो तो जायज़ है तुम नाराज़ हो जाओ मुझसे बात करने से कतराओ तमाम सवाल उठाओ  और रूठ कर कही दूर चले जाओ मगर तुम फिर भी मुझसे बात करना शायद मैं थोड़ा इतराऊं  और जो नही बता पाया उससे ज्यादा बता जाऊं  और शायद ये सिलसिला उम्र भर चले मैं रूठूं तुम मनाओ कभी तुम रूठो मैं मनाऊं हम लड़ेंगे और हंसेंगे दिल खोलकर हर बात बताई नहीं जा सकती बोल कर... जीवन की भागदौड़ में जो याद रहता है वो तुम हो तभी तो इतने तनाव के बाद भी  तुम याद आते हो तो सब अच्छा लगने लगता है वो अजीब सा आराम जो कहीं नहीं मिल पाता  न जाने क्यों तुम्हे...