आखिरी विदाई
सब ठहरे,
सब ने सोचा,
सब भावुक हुए,
सब ने लिखा,
सब से कहा,
सब गले मिले,
सब ने आंसू बहाए,
सब के लिए आखिरी बार था,
उस दृश्य को देख पाना,
उस पल में जीना,
सब में कोई नफरत न थी
सब में कोई तेजी न थी
सबको कहीं जाना न था
सारे कठोर हिम,
पिघल चुके थे...
आखिरी वक्त में,
सब इंसान देखते हैं,
बुराई नहीं, कमियां नहीं
उसके चले जाने का खालीपन,
रुलाता है सबको
झकझोरता है अंदर से कि अब,
शायद उससे कभी मुलाकात न हो
आखिरी विदाई
कुछ इस तरह बहुतों के
हिस्से में आती है
जो इंसान होते हैं
जो जीते हैं थोड़े पल
किसी के लिए,
बिना मतलब के,
बिना किसी चाहत के, उम्मीद के
उन्हें अंत में मिलती है
विजई महसूस कराने वाली विदाई...
✍️"मयंक"
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