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Showing posts from July, 2024

इश्क़ _मोहब्वत

सरल बातों से, सरल अंदाज़ में, सरलता से पेश आते हो, ऐसा सरल गुण कहां से लाते हो? जवाब में सरलता से कह दिए कि बहुत पेचीदा हूं मैं, पर मुझे बिल्कुल शीशे की तरह, साफ नज़र आते हो। क्या तुम में कोई कमी नहीं? ऐब नहीं? तुमने कहा बिल्कुल है, पर मैं समझ नहीं पाया, आखिर कैसे उसे छिपाते हो?  "मयंक"

Ganatantra Diwas

समंदर की गहराई मानो, पर्वत की ऊंचाई मानो, या मानो गगन सा विशाल, दुनिया हम से सीखती है, हमारा संविधान है बेमिसाल... हमने लड़ी एक जंग है, इसलिए दिन ये आया है, देखो कितनी शान से, फिर तिरंगा लहराया है "Mayank"

बीती _बात

कैसे दूर करें खालीपन? अब दिल को क्या समझाएं? थोड़ा वक्त ये कट जाता बस, पर वक्त कहां से लाएं? दुनिया बदली, मौसम बदला बदली सभी फिजाएं  रह गए खड़े वहीं पर हम तो किस ओर भला हम जाएं? न यार पुराने मिलते हैं अब किसको हाल सुनाएं? बस थोड़ी बातें हो जाती तो फुरसत से हम सो जाएं... मैं पहले ऐसा बिल्कुल न था पर बदली सभी हवाएं  मैने लड़ने की कोशिश भी की अब किस किस को समझाएं? इन खामोशी में बिखरा मैं शोर कहां से लाएं  कैसे दूर करें खालीपन? अब दिल को क्या समझाएं? "मयंक"