खुद समझ लो
हर बात नहीं बताई जा सकती बोल कर
तुम्हें खुद समझना होगा
क्यों मैं जी पाता हूं
संग तुम्हारे दिल खोल कर
ये तुम्हारा ही तो सवाल था न
कि मैं कैसा लगता हूं तुम्हें
तो सुनो
तुम अच्छे नहीं बहुत अच्छे लगते हो
हंसते हो तो चांद
और रोते हो तो बच्चे लगते हो
वो जो गुस्सा है तुम्हारा
उससे कहो कम आया करे
तुम गुस्से में और भी हसीन लगते हो
मैं बार बार दिल नहीं हार सकता
मुझे नहीं आता है बोलना नाप तोलकर
हर बात नहीं बताई जा सकती बोल कर...
कुछ बातों से शायद चुभन भी हो
तो जायज़ है तुम नाराज़ हो जाओ
मुझसे बात करने से कतराओ
तमाम सवाल उठाओ
और रूठ कर कही दूर चले जाओ
मगर तुम फिर भी मुझसे बात करना
शायद मैं थोड़ा इतराऊं
और जो नही बता पाया उससे ज्यादा बता जाऊं
और शायद ये सिलसिला उम्र भर चले
मैं रूठूं तुम मनाओ कभी तुम रूठो मैं मनाऊं
हम लड़ेंगे और हंसेंगे दिल खोलकर
हर बात बताई नहीं जा सकती बोल कर...
जीवन की भागदौड़ में जो याद रहता है
वो तुम हो
तभी तो इतने तनाव के बाद भी
तुम याद आते हो तो सब अच्छा लगने लगता है
वो अजीब सा आराम जो कहीं नहीं मिल पाता
न जाने क्यों तुम्हें गले लगाकर मिल जाता है
और ये चेहरा फूल की तरह खिल जाता है
तुम अजनबी से कब खास हुए बताओ?
तुम्हारी गोद में सोया हूं कोई कहानी सुनाओ
तुम्हारे हाथों को लकीरों में मेरा नाम दिखाओ
मेरा हाथ पकड़ कर ये दुनिया घुमाओ
मुझे नहीं जाना कहीं तुम्हारा हाथ छोड़कर
हर बात बताई नहीं जा सकती बोल कर...
"मयंक"
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