Posts

खुद समझ लो

हर बात नहीं बताई जा सकती बोल कर तुम्हें खुद समझना होगा क्यों मैं जी पाता हूं  संग तुम्हारे दिल खोल कर ये तुम्हारा ही तो सवाल था न कि मैं कैसा लगता हूं तुम्हें  तो सुनो तुम अच्छे नहीं बहुत अच्छे लगते हो हंसते हो तो चांद  और रोते हो तो बच्चे लगते हो वो जो गुस्सा है तुम्हारा  उससे कहो कम आया करे तुम गुस्से में और भी हसीन लगते हो मैं बार बार दिल नहीं हार सकता मुझे नहीं आता है बोलना नाप तोलकर हर बात नहीं बताई जा सकती बोल कर... कुछ बातों से शायद चुभन भी हो तो जायज़ है तुम नाराज़ हो जाओ मुझसे बात करने से कतराओ तमाम सवाल उठाओ  और रूठ कर कही दूर चले जाओ मगर तुम फिर भी मुझसे बात करना शायद मैं थोड़ा इतराऊं  और जो नही बता पाया उससे ज्यादा बता जाऊं  और शायद ये सिलसिला उम्र भर चले मैं रूठूं तुम मनाओ कभी तुम रूठो मैं मनाऊं हम लड़ेंगे और हंसेंगे दिल खोलकर हर बात बताई नहीं जा सकती बोल कर... जीवन की भागदौड़ में जो याद रहता है वो तुम हो तभी तो इतने तनाव के बाद भी  तुम याद आते हो तो सब अच्छा लगने लगता है वो अजीब सा आराम जो कहीं नहीं मिल पाता  न जाने क्यों तुम्हे...

जीवन_राही

              जब तुमको खबर नहीं हमारी                तो हम भी तुमसे क्यों पूछें                 कि कैसा हाल तुम्हारा है ?               तुम न ठहरे पल भर भी तब                ये प्रेम भाव फिर अब कैसा?                 ये कैसा अजब नज़ारा है?                           "मयंक"

Sharan tumhari me

 सुंदर नयन, है कंचन काया, जिनका होना ठंडी छाया, जीवन का जो सार बताए, कठिनाई को शस्त्र बनाए, जिसने पल में सब कुछ त्यागा, जो बस सत्य के पीछे भागा, सबसे सुंदर एक ही काम, जपते जाना जय श्री राम... " Mayank Prakash "